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अपार उमंग और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ तीन दिवसीय इंदौर महोत्सव

इन्दौर | इंदौर में एक अभिनव पहल के साथ शुरू किया गया तीन दिवसीय इंदौर महोत्सव आज यहां अपार उमंग और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ।  तीन दिन तक चले इस महोत्सव में हजारों नागरिकों ने जहां एक ओर सांस्कृतिक, परम्परागत कार्यक्रमों और साहसिक खेलों का आनंद लिया वहीं दूसरी ओर उन्होंने मालवा और विशेषकर इंदौर के लजीज व्यंजनों का स्वाद भी लिया।  महोत्सव का समापन आज पीपल्यापाला रीजनल पार्क में पुणे की प्रसिद्ध लामबाडा के रॉक बैण्ड और सुश्री शालमली के सुरमयी प्रस्तुतियों के साथ किया गया।  समापन अवसर पर आज कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी, डीआईजी श्री राकेश गुप्ता, एडीएम श्री आलोक कुमार सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री आशीष सिंह, अपर कलेक्टर श्री रविन्द्र सिंह, पर्यटन विकास निगम के महाप्रबंधक श्री एम.एन.जमाली, कार्यक्रम के नोडल अधिकारी श्री विशाल नाडकर्णी सहित अन्य अधिकारी और हजारों की संख्या में उत्सव प्रेमी नागरिक मौजूद थे।shahdol - malawa samapan

संस्कृति एवं परम्परा एवं आधुनिकता का अनुठा समावेश

    इंदौर में पर्यटन गतिविधियों के विकास और प्रोत्साहन के लिये शुरू किये गये इस तीन दिवसीय महोत्सव के हजारों नागरिक साक्षी बने।  इन नागरिकों ने कला, संस्कृति, परम्परा और आधुनिकता का अनूठा समावेश देखा ।  इस तीन दिवसीय मेले में नागरिकों के लिये सांस्कृतिक कार्यक्रम, हाट बाजार, साहसिक खेल और बच्चों के लिये मनोरंजन के कार्यक्रम भी आयोजित किये गये।  

पलक मुझाल ने दी प्रस्तुति

      महोत्सव के पहले दिन सुप्रसिद्ध सिने पार्श्व गायिका सुश्री पलक मुझाल ने सुगम संगीत की प्रस्तुति दी, जिसे श्रोतावर्ग ने अत्यधिक सराहा। उन्होंने फिल्मों में गाए गीतों हम तेरे बिन कभी रह नहीं सकते, मैं हो गई तेरी दीवानी हवा के झोंका आज मौसमों को लूट गए आदि की प्रस्तुति से समा बांध दिया। श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से अपने शहर की प्रिय गायिका का इस्तकबाल किया। पलक के साथ उनके भाई ने भी संगत की।

कवि सम्मेलन

    महोत्सव के दूसरे दिन विशाल कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।  बारिश के चलते यह आयोजन रीजनल पार्क की जगह स्थानीय रविन्द्र नाट्य गृह में आयोजित किया गया।  नागरिकों के उत्साह को बारिश भी नहीं रोक सकी।  इस आयोजन में बड़ी संख्या में नागरिकों ने देश के सुप्रसिद्ध कवियों की रचनाओं को सूना।  कवि सम्मेलन में गंगा जमुनी संस्कृति की मिसाल भी देखने को मिली।  इस कवि सम्मेलन में राष्ट्रीय स्तर के कवि श्री प्रदीप चौबे, श्री सुरेन्द्र शर्मा, श्री सत्यनारायण सत्तन, सुश्री लता हया, श्री आशीष अनल, श्री दिनेश बावरा आदि ने अपनी प्रस्तुतियां दी वहीं दूसरी ओर उर्दू के प्रख्यात शायर श्री राहत इंदौरी आदि ने भी अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधा। 

रॉक बैण्ड और संगीत की सुरमयी प्रस्तुति

    महोत्सव का अंतिम दिन पुणे के रॉक बैण्ड लामबाडा और सुश्री शालमली के नाम रहा।  महोत्सव की अंतिम संध्या में पुणे के रॉक बैण्ड ने जहां विभिन्न फिल्मी गीत प्रस्तुत किये वहीं दूसरी ओर उन्होंने सुफियाना संगीत भी प्रस्तुत किया। इसके बाद सुप्रसिद्ध गायिका सुश्री शालमली ने अपनी सुरमयी प्रस्तुतियां दीं।  संगीत प्रेमी नागरिकों ने नाचकर अपने उत्साह का इजहार किया। 

लजीज व्यंजन, हस्तशिल्प एवं बच्चों के झूले

    रीजनल पार्क में ही एक ओर जहां हस्तशिल्प मेला लगा था जिसमें विभिन्न स्थानों से आए कलाकारों ने अपने हस्त शिल्प प्रदर्शित किए थे वहीं दूसरी ओर फूड जोन में मालवा के स्वादिष्ट व्यंजनों के स्टॉल लगे थे जिनका सैलानी लुत्फ उठा रहे थे। पार्क रंगबिरंगी लाइटिंग, फुव्वारों के साथ सुर-लहरियों से गूंज रहा था जो सभी का मन मोह रहे थे।

साहसिक खेल

    महोत्सव के अंतर्गत चोरल डेम क्षेत्र में साहसिक गतिविधियों का आयोजन किया गया।  इस आयोजन में सैकड़ों नागरिकों ने साहसिक खेलों में शिरकत की।  नागरिकों के लिये पैरामोटर, पैरासेलिंग, रॉकक्लायबिंग, मोटरवोट आदि का आयोजन किया गया।

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