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ग्रीष्मकालीन सब्जियों की खेती कर लाभ कमायें किसान

अनूपपुर। उप संचालक कृषि आर.एल. जामरे ने जिले के किसानों को समझाइश दी है कि वर्तमान परिस्थिति में ऐसी उद्यानिकी फसलें ग्रीष्मकाल में लगाई जा सकती है, जिनसे अधिक आय प्राप्त हो सकती है। इन फसलों में ङ्क्षभडी, लौकी, गिलकी, करेला, तरबूज, खरबूज, कक$डी और बरवटी शामिल है। क्षभडी की पूसा सवानी, हिसार उन्नत, पूसा कोमल, परभनी क्रान्ति, अर्का अभय, अर्का अनामिका, हरभजन, काशी प्रगति, काशी विभूति आदि किस्में लगाई जा सकती हैं। इनकी बीज दर १५ से २० किलो प्रति हेक्टेयर रहेगी।anu news -2
लौकी की पूसा समर प्रोलीफिक लौंग, पूसा समर प्रोलीफिक राउण्ड, नरेन्द्र रश्मि, अर्का बहार, पूसा नवीन आदि किस्में लगाई जा सकती हैं। इनकी बीज दर ३ से ४ किलो प्रति हेक्टेयर रहेगी। गिलकी की पूसा चिकनी, बरसता, धुबरी आदि किस्में लगाई जा सकती हैं। इनकी बीज दर भी ३ से ४ किलो प्रति हेक्टेयर रहेगी। इसी प्रकार करेले की प्रिया, पूसा दो मौसमी, अर्का हरित, प्राइड ऑफ गुजरात आदि किस्में किसान लगा सकते हैं। इनकी बीज दर ३ से ४ किलो प्रति हेक्टेयर रहेगी। तरबूज की अगस्ता, सुपर ङ्क्षकग, शुगर ड्रेगन, शहंशाह आदि किस्मे लगाई जा सकती हैं।

इनकी बीज दर ५ से ६ किलो प्रति हेक्टेयर है। खरबूज की अर्का राजहंस, हरा मधु, अर्का जेस्ट, दुर्गा मधु, पंजाब सुनहरी आदि किस्में लगाई जा सकती हैं। इनकी बीज दर ३ से ४ किलो प्रति हेक्टेयर है। कक$डी की डिलीशियस, टेस्टी आदि किस्में लगाई जा सकती हैं, जिनकी बीज दर ५ से ६ किलो प्रति हेक्टेयर है। बरवटी की डार्क ग्रीन, रेड नूडल, ओरिएंट वण्डर, अर्का गरिमा, पूसा दो फसली आदि किस्में किसान लगा सकते हैं।
इनकी बीज दर ४० से ६० किलो प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है। उन्होंने जिले के किसानों से कहा है कि वे उपरोक्त सब्जियों के बीज विश्वसनीय एवं सरकारी संस्थानों से ही खरीदें। अभी इन फसलों की बोवनी की जा सकती है।
ङ्क्षसचाई के लिये उपलब्धता के अनुसार ड्रिप, स्प्रींकलर का प्रयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही ङ्क्षसचाई जल को भाप बनकर उ$डने से बचाने के लिये मल्ंिचग का उपयोग तथा परिवहन के लिये प्लास्टिक क्रेट्स का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। सक्षम किसान संरक्षित खेती का उपयोग कर बेमौसम सब्जियों का उत्पादन कर के भी अधिक लाभ कमा सकते हैं।

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